एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। अर्जुन बहुत होनहार था, लेकिन उसे एक समस्या थी—उसे छोटी-छोटी बातों पर बहुत जल्दी गुस्सा आ जाता था।
एक दोपहर, अर्जुन का सबसे अच्छा दोस्त रोहन लकड़ी की एक सुंदर नाव बना रहा था। अर्जुन उस नाव को देखने के लिए बहुत उत्साहित था। जैसे ही अर्जुन नाव को करीब से देखने के लिए झुका, रोहन का हाथ गलती से अर्जुन से टकरा गया। अर्जुन को तुरंत गुस्सा आ गया और वह रोहन पर चिल्लाने लगा। रोहन उदास हो गया और चुपचाप खड़ा रहा।
तभी अर्जुन के दादाजी ने उसे पास बुलाया और प्यार से समझाया, 'अर्जुन, गुस्सा एक ऐसी आग है जो दूसरों को जलाने से पहले तुम्हारे मन की शांति को जला देती है। यदि तुम अपने मन में क्रोध को नहीं पालोगे, तो तुम जो चाहोगे, वह तुम्हें आसानी से मिल जाएगा।'
अर्जुन ने कुछ देर सोचा। उसे अहसास हुआ कि अगर वह गुस्से में रहा, तो वह अपना दोस्त और वह सुंदर नाव, दोनों खो देगा। उसने एक गहरी सांस ली, अपना गुस्सा शांत किया और रोहन से कहा, 'मुझे माफ कर दो रोहन, मुझे चिल्लाना नहीं चाहिए था।' रोहन मुस्कुराया और उसने वह नाव अर्जुन को दे दी। अर्जुन के मन की शांति ने उसके दिन को खुशियों से भर दिया।