एक सुंदर गाँव में कार्तिक और रोहन नाम के दो दोस्त रहते थे। कार्तिक बहुत शांत स्वभाव का था, लेकिन रोहन छोटी-छोटी बातों पर बहुत गुस्सा हो जाता था। एक दिन गाँव में बागवानी प्रतियोगिता आयोजित की गई। दोनों लड़के अपने पौधों की बहुत देखभाल कर रहे थे।
अचानक, रोहन का पैर फिसल गया और वह कार्तिक के लगाए हुए छोटे से पौधे पर गिर गया। पौधा टूट गया। रोहन गुस्से से लाल हो गया और चिल्लाने लगा, "तुमने यह पौधा यहाँ क्यों लगाया? मेरी चोट तुम्हारी वजह से हुई है!" कार्तिक चुप रहा, लेकिन रोहन के गुस्से ने उसे अंदर से खाली और दुखी कर दिया। गुस्से के कारण रोहन ने न केवल अपना दोस्त खोया, बल्कि अपनी शांति भी खो दी।
शाम को कार्तिक ने रोहन से कहा, "गुस्सा एक आग की तरह है, रोहन। यह दूसरों को जलाने से पहले हमें खुद ही जला देता है।" रोहन को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने सीखा कि असली ताकत गुस्से को काबू करने में है। उस दिन के बाद, रोहन एक शांत और खुशमिजाज इंसान बन गया।