एक शांत घाटी में लियो नाम का एक लड़का रहता था। लियो को खेलना बहुत पसंद था और उसे लगता था कि उसके पास बहुत सारा समय है। उसके दादाजी, साइलस, एक घड़ीसाज़ थे।
एक दिन लियो तितलियों के पीछे भाग रहा था। उसने पूछा, 'दादाजी, क्या मैं थोड़ी देर और खेल सकता हूँ?' साइलस ने मुस्कुराते हुए कहा, 'लियो, जो लोग समय की कीमत नहीं जानते, उनके लिए समय एक खेल के मैदान जैसा है। लेकिन बुद्धिमान लोगों के लिए, समय एक तेज़ आरी की तरह है जो धीरे-धीरे हमारे जीवन के दिनों को काटती रहती है। इसलिए, हर पल का सही उपयोग करो।'
लियो ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उसने सोचा, 'समय तो बस घड़ी की सुइयां हैं!' वह हर काम को 'कल करेंगे' कहकर टालता रहा। उसने पढ़ाई और नई चीज़ें सीखने के बजाय खेलने में अपना सारा समय बिता दिया।
वर्ष बीत गए। एक दिन लियो ने एक सुंदर लकड़ी की नाव बनाने की कोशिश की, जो उसका सपना था। लेकिन जब उसने कोशिश की, तो उसे एहसास हुआ कि उसने सीखने का समय गँवा दिया है और अब उसके हाथ उतने कुशल नहीं रहे। तब उसे दादाजी की बात याद आई। उसे समझ आया कि समय केवल टिक-टिक नहीं करता, बल्कि वह हमारे अवसरों को छीन लेता है। उस दिन से, लियो ने 'कल' का इंतज़ार करना छोड़ दिया और 'आज' में जीना शुरू कर दिया।