एक घने जंगल में नीलू नाम की एक प्यारी सी चिड़िया रहती थी। नीलू ने एक ऊंचे पेड़ पर अपना घोंसला बनाया था और उसमें एक सुंदर सा अंडा रखा था। वह उस अंडे का बहुत ख्याल रखती थी, जैसे वह उसकी पूरी दुनिया हो। वह घंटों उसके पास बैठकर मधुर गीत गाती ताकि अंडा सुरक्षित रहे।
समय बीतता गया। एक सुबह, उस अंडे में एक छोटी सी दरार दिखाई दी। नीलू घबरा गई, उसे लगा कि कहीं अंडे को कुछ हो तो नहीं गया। लेकिन तभी, उस दरार से एक नन्हा सा बच्चा बाहर निकला। वह नन्हा पक्षी धीरे-धीरे बड़ा हुआ और एक दिन अपने पंख फड़फड़ाते हुए नीले आसमान की ओर उड़ गया।
नीलू को अपने बच्चे को उड़ते देख बहुत गर्व हुआ, लेकिन जब उसने घोंसले में उस खाली अंडे के छिलके को देखा, तो उसका मन थोड़ा भारी हो गया। वह अंडा, जो कभी उसकी जान था, अब बस एक खाली खोल रह गया था। नीलू समझ गई कि जिस तरह पक्षी को जीवन जीने के लिए अंडे को छोड़ना पड़ता है, उसी तरह आत्मा को भी इस शरीर को छोड़कर आगे बढ़ना होता है।