एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। अर्जुन को अपने खिलौनों से बहुत लगाव था। लेकिन एक समस्या थी; यदि उसका कोई खिलौना टूट जाता या उसे नया खिलौना नहीं मिलता, तो वह घंटों रोता रहता था। उसकी खुशी पूरी तरह से उन चीजों पर टिकी थी।
एक दिन, गाँव में एक ज्ञानी महात्मा आए। अर्जुन को खिलौने के लिए रोते देख, उन्होंने उसे एक छोटा सा पत्थर दिया। महात्मा ने कहा, 'अर्जुन, जब भी तुम्हें किसी चीज़ के खोने का दुख हो, इस पत्थर को पकड़ना और मन में कहना कि मैंने उस चीज़ के प्रति अपना मोह त्याग दिया है।'
कुछ दिनों बाद, अर्जुन का सबसे पसंदीदा खिलौना खो गया। वह रोने ही वाला था कि उसे महात्मा की बात याद आई। उसने पत्थर को कसकर पकड़ा और सोचा, 'मैंने इस खिलौने के प्रति अपना लगाव छोड़ दिया है।' देखते ही देखते, उसका दुख गायब हो गया। उसे अब उस खिलौने के खोने का कोई दर्द महसूस नहीं हो रहा था। उसने समझ लिया कि दर्द खिलौना खोने से नहीं, बल्कि उसे पाने की इच्छा से होता है।