एक शांत गाँव में लियो नाम का एक लड़का अपने पिता थॉमस के साथ रहता था। एक दिन नदी के किनारे टहलते समय, लियो को मिट्टी में कुछ चमकता हुआ दिखाई दिया। 'पिताजी, देखिए! मुझे सोना मिल गया!' लियो खुशी से चिल्लाया।
थॉमस ने उस चीज़ को उठाया और ध्यान से देखा। 'लियो, यह सोना नहीं है। यह सिर्फ एक पत्थर है जो सूरज की रोशनी में चमक रहा है,' उन्होंने प्यार से समझाया। लेकिन लियो नहीं माना। 'नहीं पिताजी, यह पक्का सोना है! इससे हम बहुत अमीर बन जाएंगे!' उसने उस पत्थर को अपना सबसे कीमती खजाना मान लिया और उसे हर समय अपने पास रखने लगा।
कुछ दिनों बाद एक तेज़ तूफान आया। जब अगली सुबह सूरज निकला, तो वह पत्थर कीचड़ से भर चुका था और उसकी चमक गायब हो गई थी। अब वह एक साधारण सा पत्थर लग रहा था। लियो यह देखकर रोने लगा। थॉमस ने उसके पास बैठकर कहा, 'बेटा, गलती पत्थर मिलने में नहीं थी, गलती यह मानने में थी कि जो चीज़ अस्थायी है, वह हमेशा के लिए सच है। जब हम भ्रम को सच मान लेते हैं, तो हम रास्ता भटक जाते हैं।' लियो को अपनी गलती समझ आ गई और उसने सीखा कि चमकती हुई हर चीज़ कीमती नहीं होती।