नीलगिरी नाम के एक सुंदर गाँव में कविनी नाम की एक लड़की रहती थी। उसे सुंदर चीज़ें बनाना बहुत पसंद था। एक दिन बाज़ार में उसने एक बहुत ही चमकदार और रंगीन रेशमी कपड़ा देखा। उस कपड़े की चमक देखकर कविनी के मन में उसे पाने की तीव्र इच्छा जागी। उसने सोचा, 'अगर यह कपड़ा मेरे पास होता, तो मैं कितनी खुश होती!'
उस दिन के बाद से कविनी बदल गई। उसका मन हर समय बस उसी कपड़े के बारे में सोचता रहता। उसने अपनी माँ की मदद करना और दोस्तों के साथ खेलना भी छोड़ दिया। वह इच्छा अब एक बोझ बन गई थी, जिसने उसकी मुस्कान छीन ली थी। वह हर समय बेचैन और उदास रहने लगी।
उसके दादाजी ने उसकी उदासी देखी और उसे पास बुलाकर समझाया, 'कविनी, इच्छा एक सुंदर भ्रम की तरह होती है। यह हमें लुभाती तो है, लेकिन धीरे-धीरे हमारी शांति छीन लेती है। अगर हम अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण नहीं रखेंगे, तो वे हमें धोखा देकर हमारा सब कुछ छीन सकती हैं।'
कविनी को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने समझा कि उस कपड़े से कहीं ज्यादा कीमती उसकी मानसिक शांति है। उसने अपनी इच्छाओं पर काबू पाना सीखा और फिर से खुश रहने लगी।