एक शांत गाँव में सोमू और रघु नाम के दो मित्र रहते थे। सोमू बहुत मेहनती था, लेकिन उसका भाग्य हमेशा उसका साथ नहीं देता था। एक साल भीषण सूखे के कारण सोमू की सारी फसलें बर्बाद हो गईं। इस दुख और गरीबी ने सोमू को तोड़ दिया। वह हर समय बस यही सोचता रहता, 'मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है?' इस निराशा ने उसे चिड़चिड़ा और मूर्ख बना दिया। वह गलत फैसले लेने लगा और दूसरों पर गुस्सा करने लगा।
दूसरी ओर, रघु एक समृद्ध किसान था। उसके पास सब कुछ था। लेकिन रघु ने अपनी संपन्नता को अहंकार नहीं बनने दिया। इसके बजाय, उसने अपनी सुख-सुविधाओं का उपयोग नया सीखने के लिए किया। उसने खेती के नए तरीके और मौसम के विज्ञान को समझना शुरू किया। उसकी समृद्धि ने उसके ज्ञान और बुद्धि को और अधिक बढ़ाया।
समय बीतता गया। सोमू ने महसूस किया कि उसकी कड़वाहट ही उसकी असली समस्या है। उसने धैर्य रखना सीखा और खुद को बदला। रघु की समझदारी ने पूरे गाँव की मदद की। दोनों ने सीखा कि समय केवल हमारे हालात ही नहीं बदलता, बल्कि हमारे सोचने का तरीका भी बदल देता है।