एक छोटे से गाँव में अर्जुन और रोहन नाम के दो पक्के दोस्त रहते थे। वे एक ही स्कूल में पढ़े और एक ही माहौल में बड़े हुए। लेकिन जैसे-जैसे वे बड़े हुए, उनके जीवन की राहें अलग होती गईं।
अर्जुन बहुत मेहनती था, लेकिन उसका मन पढ़ाई में कम लगता था। उसने अपने पिता की छोटी सी दुकान संभाल ली। वह दिन-रात काम करता था, लेकिन उसकी कमाई और जीवन बहुत साधारण ही रहा।
दूसरी ओर, रोहन को ज्ञान प्राप्त करने का बहुत शौक था। वह घंटों किताबें पढ़ता रहता था। अपनी इसी लगन के कारण वह एक बड़ा विद्वान और बाद में एक सफल शिक्षक बना। उसे समाज में बहुत सम्मान और धन दोनों प्राप्त हुए।
एक शाम अर्जुन ने उदास होकर पूछा, "रोहन, हम दोनों एक ही जगह बढ़े, फिर हमारे जीवन में इतना अंतर क्यों है?"
रोहन ने शांति से उत्तर दिया, "मित्र, मेहनत तो जरूरी है ही, लेकिन संसार का अपना एक नियम है। प्रकृति ने कुछ लोगों के लिए धन का मार्ग चुना है, तो कुछ के लिए ज्ञान का। यह सब नियति का खेल है। हमें दूसरों से तुलना करने के बजाय अपने कर्म पर ध्यान देना चाहिए।"
अर्जुन को बात समझ आ गई। उसने दूसरों से तुलना करना छोड़ दिया और अपनी दुकान को पूरी ईमानदारी और खुशी से चलाने लगा।