एक सुंदर से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत बुद्धिमान था और हर काम की बहुत सावधानी से योजना बनाता था। एक बार गाँव में एक बड़ा उत्सव था। अर्जुन ने सोचा कि वह एक कागज़ की नाव बनाएगा और उसे पास की नदी में चलाएगा।
उसने अपने दोस्तों से कहा, 'मेरी नाव को कोई नहीं रोक पाएगा। मैंने रास्ते में छोटे-छोटे पत्थर के बांध बनाए हैं ताकि कोई बाधा न आए।' उसने बहुत मेहनत से अपनी योजना बनाई और सुरक्षा के इंतजाम किए। उसे पूरा विश्वास था कि सब कुछ उसके नियंत्रण में है।
लेकिन तभी अचानक मौसम बदल गया और बहुत तेज़ बारिश होने लगी। शांत नदी देखते ही देखते उफान पर आ गई। अर्जुन ने जो छोटे बांध बनाए थे, वे पानी के तेज़ बहाव में बह गए। उसकी नाव भी लहरों के साथ बह गई। अर्जुन उदास हो गया। तब उसके दादाजी ने उसे समझाया, 'बेटा, तुम्हारी योजना अच्छी थी, लेकिन कभी-कभी हम किसी परिस्थिति से बचने के लिए जो उपाय करते हैं, वही उपाय उस परिस्थिति का हिस्सा बन जाता है। भाग्य को टालना हमारे हाथ में नहीं है।' अर्जुन समझ गया कि जीवन में सब कुछ हमारी योजना के अनुसार नहीं होता।