एक बहुत सुंदर राज्य में अर्जुन नाम का एक राजकुमार रहता था। वह हमेशा सोचता था कि एक महान राजा बनने के लिए क्या आवश्यक है?
एक बार राज्य पर संकट आया। पड़ोसी राज्य के सेनापति ने राज्य की नदी का रास्ता रोक दिया, जिससे लोग प्यासे मरने लगे। अर्जुन ने सबसे पहले साहस दिखाया। वह डरा नहीं, बल्कि अपनी प्रजा की रक्षा के लिए निडर होकर खड़ा हुआ (निर्भयता).
जब किसान संकट में थे, तो अर्जुन ने अपने राजकोष से अनाज और सहायता भेजी ताकि कोई भूखा न रहे (उदारता).
अर्जुन जानता था कि युद्ध से केवल विनाश होता है। इसलिए उसने अपनी बुद्धि का प्रयोग किया और शत्रु के साथ शांति समझौता करने की एक चतुर योजना बनाई (बुद्धि).
अंत में, उसने इस योजना को पूरा करने के लिए दिन-रात एक कर दिया। वह बिना थके, पूरी ऊर्जा के साथ काम में जुट गया (उत्साह).
अर्जुन के इन चार गुणों—निडरता, उदारता, बुद्धि और उत्साह—के कारण बिना युद्ध किए शांति स्थापित हो गई। प्रजा ने उसे अपना सच्चा राजा मान लिया।