एक सुंदर से गाँव में करी नाम का एक लड़का रहता था। वह पढ़ाई में बहुत तेज़ था और स्कूल में जो कुछ भी पढ़ाया जाता, उसे तुरंत याद कर लेता था। लेकिन उसमें एक कमी थी—वह बहुत घमंडी था। वह अक्सर अपने दोस्तों से कहता, 'मुझे सब पता है, मैं तुमसे बेहतर हूँ!'
एक दिन गाँव के एक बुजुर्ग बीमार पड़ गए। करी ने गर्व से कहा कि उसने विज्ञान में बहुत कुछ पढ़ा है। लेकिन जब उसे मदद करने की बारी आई, तो वह घबरा गया। उसे बातें तो याद थीं, लेकिन उन्हें असलियत में कैसे करना है, यह उसे नहीं पता था।
उसके पिता ने उसे पास बुलाकर समझाया, 'करी, केवल रटना काफी नहीं है। किसी भी चीज़ को गहराई से और बिना किसी गलती के सीखना ज़रूरी है, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि तुम जो सीखो, वैसा ही तुम्हारा व्यवहार भी होना चाहिए। ज्ञान केवल किताबों में नहीं, तुम्हारे कर्मों में दिखना चाहिए।'
करी को अपनी गलती का अहसास हुआ। उस दिन के बाद, उसने केवल परीक्षा पास करने के लिए नहीं, बल्कि समझने के लिए पढ़ना शुरू किया। वह दूसरों के प्रति विनम्र बना और अपने ज्ञान का उपयोग दूसरों की मदद करने में करने लगा। वह केवल एक बुद्धिमान लड़का ही नहीं, बल्कि एक नेक इंसान भी बना।