एक शांत गाँव में कविन नाम का एक लड़का रहता था। कविन बहुत फुर्तीला था, लेकिन उसकी एक बुरी आदत थी—वह कभी किसी की बात ध्यान से नहीं सुनता था। उसे लगता था कि उसे सब कुछ पता है।
एक दिन, गाँव के बुजुर्ग सोमू दादा बच्चों को कहानियाँ सुना रहे थे। उन्होंने नदी के किनारे के रास्ते के बारे में बताते हुए चेतावनी दी, 'बच्चों, नदी के पास का रास्ता बहुत फिसलन भरा है, इसलिए वहाँ जाने से पहले बड़ों की सलाह ज़रूर सुन लेना।' कविन ने मन ही मन सोचा, 'यह तो बस एक कहानी है, मुझे सब पता है,' और वह अकेले ही नदी किनारे निकल गया।
वहाँ पहुँचकर उसने देखा कि रास्ता वाकई बहुत कठिन और झाड़ियों से भरा था। जल्दबाजी में चलते हुए कविन का पैर फिसल गया और वह कीचड़ में गिर गया। उसके पैर में चोट लग गई। उस समय उसे अहसास हुआ कि सोमू दादा की वह छोटी सी चेतावनी कितनी ज़रूरी थी। सौभाग्य से, एक राहगीर ने उसकी मदद की। उस दिन के बाद कविन बदल गया। उसने तय किया कि वह हर अच्छी सलाह को, चाहे वह कितनी भी छोटी क्यों न हो, ध्यान से सुनेगा। धीरे-धीरे, उसकी इसी समझदारी ने उसे गाँव का सबसे सम्मानित व्यक्ति बना दिया।