एक सुंदर से गाँव में लियो नाम का एक लड़का रहता था। लियो बहुत फुर्तीला था, लेकिन उसकी एक बुरी आदत थी; वह कभी किसी की बात ध्यान से नहीं सुनता था। जब उसकी माँ उसे समझाती, तो वह 'मुझे पता है' कहकर भाग जाता। जब स्कूल में शिक्षक कुछ महत्वपूर्ण सिखाते, तो वह खिड़की से बाहर चिड़ियों को देखने लगता।
एक दिन गाँव के एक बुजुर्ग ने बच्चों को चेतावनी दी, "आसमान में बादल दिख रहे हैं, अगर तुम बिना तैयारी के बारिश में भीगोगे, तो बीमार पड़ जाओगे।" लियो ने सोचा, 'ये तो बस डरा रहे हैं,' और वह अपने दोस्तों के साथ खेलने चला गया। शाम को तेज़ बारिश होने लगी और लियो भीगते हुए खेलता रहा। अगली सुबह लियो को तेज़ बुखार आ गया।
जब उसकी माँ उसे दवाई दे रही थीं, तो लियो उदास होकर बोला, "माँ, मुझे ऐसा क्यों हुआ?" माँ ने प्यार से समझाया, "लियो, कान सिर्फ शोर सुनने के लिए नहीं होते, बल्कि अच्छी बातों को समझने के लिए होते हैं। जो कान सीख नहीं सकते, वे सुनने के बावजूद बहरे के समान हैं।" उस दिन के बाद से लियो ने दूसरों की बातों को ध्यान से सुनना शुरू कर दिया। उसने सीखा कि सुनना ही सीखने की पहली सीढ़ी है।