बहुत समय पहले, चंद्रपुर नामक एक समृद्ध राज्य में विक्रम नाम का एक युवा राजा रहता था। विक्रम दयालु था, लेकिन वह जानता था कि राज्य चलाना एक बड़ी जिम्मेदारी है। जब उसे अपने मंत्रियों को चुनने का समय आया, तो उसके मित्र अर्जुन ने सुझाव दिया, 'विक्रम, हमें अपने करीबी दोस्तों को ही मंत्री बनाना चाहिए, वे हमेशा हमारा साथ देंगे।'
विक्रम थोड़ा हिचकिचाया। उसे अपने पिता की बात याद थी: 'मंत्री राजा की आँखों के समान होते हैं। यदि आँखें धुंधली हों, तो राजा सही रास्ता नहीं देख पाएगा।' यह परखने के लिए, विक्रम ने दो लोगों को चुना: रोहन और सिद्धार्थ।
रोहन बहुत मीठा बोलता था और राजा की हर बात पर 'हाँ' मिलाता था। दूसरी ओर, सिद्धार्थ शांत था लेकिन बहुत बुद्धिमान और ईमानदार था। विक्रम ने उन्हें परखने के लिए एक योजना बनाई। उसने रोहन से कहा, 'इस योजना से हम जल्दी अमीर बन सकते हैं, भले ही हमें कुछ नियम तोड़ने पड़ें।' रोहन तुरंत मान गया। फिर उसने सिद्धार्थ से वही बात कही। सिद्धार्थ ने सिर हिलाया और कहा, 'महाराज, गलत रास्ते से मिली सफलता स्थायी नहीं होती। हमें राज्य की भलाई के लिए सही मार्ग चुनना चाहिए।'
कुछ समय बाद, राज्य में अनाज की कमी होने वाली थी। रोहन ने सुझाव दिया कि मुनाफा कमाने के लिए सारा अनाज बेच दिया जाए। लेकिन सिद्धार्थ ने पहले ही भविष्य के लिए अनाज सुरक्षित रखने की योजना बना ली थी। विक्रम समझ गया कि रोहन केवल एक दोस्त था, लेकिन सिद्धार्थ एक सच्चा मार्गदर्शक था। उसने सिद्धार्थ को अपना मुख्य मंत्री नियुक्त किया, यह समझते हुए कि एक राजा को ऐसे लोगों की आवश्यकता होती है जो उसकी आँखों की तरह सत्य देख सकें।