एक छोटे से गाँव में आर्यन और समीर नाम के दो पक्के दोस्त रहते थे। आर्यन बहुत ही नेक और समझदार लड़का था, जबकि समीर को भीड़ का हिस्सा बनना पसंद था। एक दिन गाँव के कुछ शरारती लड़कों ने समीर को चिढ़ाना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा, 'तुम हमेशा उस शांत आर्यन के साथ क्यों रहते हो? उसके साथ रहने में कोई मज़ा नहीं है। अगर तुम्हें हमारे साथ रहना है, तो तुम्हें आर्यन से दोस्ती तोड़नी होगी।'
समीर के मन में द्वंद्व चलने लगा। उसे लगा कि अगर वह उन लड़कों के साथ मिल जाएगा, तो वह गाँव में लोकप्रिय हो जाएगा। उसने एक पल के लिए सोचा कि क्या आर्यन को छोड़ देना सही होगा? लेकिन जब उसने आर्यन की ओर देखा, तो उसे आर्यन की सादगी और उसकी अच्छाई याद आई। समीर ने उन लड़कों की बात नहीं मानी और आर्यन के पास ही बैठा रहा। उन लड़कों ने समीर का मज़ाक उड़ाया और उसे अकेला छोड़ दिया। लेकिन कुछ समय बाद, जब उन लड़कों ने कोई बड़ी गलती की और वे मुसीबत में फँस गए, तब केवल आर्यन ही था जिसने उन्हें सही रास्ता दिखाया और उनकी मदद की। तब समीर को समझ आया कि बहुत से लोगों की नफरत सहना, एक अच्छे दोस्त को खोने से कहीं बेहतर है।