चंद्रपुर नाम के एक समृद्ध राज्य में विक्रम नाम का एक शक्तिशाली राजा रहता था। विक्रम के पास एक बहुत बड़ी सेना थी, जिसमें हजारों बहादुर सैनिक, सैकड़ों हाथी और तेज घोड़े शामिल थे। उसे अपनी विशाल सेना पर बहुत गर्व था। एक बार, जब वह युद्ध जीतने के लिए निकला, तो रास्ते में एक बहुत ही संकरा पहाड़ी रास्ता आया। वह रास्ता इतना छोटा था कि एक बार में केवल एक ही हाथी निकल सकता था।
विक्रम के बुद्धिमान सलाहकार, अर्जुन ने उसे रोका, "महाराज, कृपया रुकिए। यह रास्ता हमारी विशाल सेना के लिए बहुत संकरा है। यदि हम यहाँ प्रवेश करते हैं, तो हमारे हाथी और घोड़े फंस जाएंगे और हम ठीक से लड़ नहीं पाएंगे," अर्जुन ने चेतावनी दी। लेकिन विक्रम को अपनी सेना की शक्ति पर बहुत घमंड था। उसने हँसते हुए कहा, "अर्जुन, मेरी सेना अजेय है! कोई भी बाधा हमें नहीं रोक सकती!"
जैसे ही विशाल सेना उस संकरे रास्ते में घुसी, अफरा-तफरी मच गई। हाथी एक-दूसरे से टकराने लगे और सैनिकों को तलवार चलाने तक की जगह नहीं मिली। तभी, एक छोटी सी दुश्मन सेना ने ऊपर से हमला कर दिया। विक्रम की सेना बड़ी तो थी, लेकिन उस तंग जगह में वे न तो भाग सके और न ही सही से लड़ सके। अंत में, अपनी बड़ी सेना के बावजूद, विक्रम को हार का सामना करना पड़ा। उसे समझ आ गया कि शक्ति का सही उपयोग करने के लिए सही स्थान का होना भी जरूरी है।