बहुत समय पहले की बात है, चोल साम्राज्य के राजा विक्रम एक बुद्धिमान मंत्री की तलाश में थे। वे जानते थे कि एक समृद्ध राज्य के लिए एक भरोसेमंद सलाहकार का होना बहुत ज़रूरी है। उन्होंने तीन युवकों को चुना: कधिर, मारन और इलंगो।
सबसे पहले, राजा ने कधिर की परीक्षा ली। कधिर बहुत बुद्धिमान था, लेकिन उसे धन का बहुत लालच था। राजा ने उसे गुप्त रूप से कुछ स्वर्ण मुद्राएं दीं और कहा कि इनका राज्य के लिए उपयोग करे। लेकिन कधिर ने कुछ सिक्के अपने पास छिपा लिए। राजा समझ गए कि कधिर धन के लोभ में ईमानदार नहीं रहेगा।
फिर राजा ने मारन की परीक्षा ली। मारन एक खुशमिजाज व्यक्ति था, लेकिन उसे विलासिता और सुख-सुविधाओं का बहुत शौक था। महल के उत्सवों के दौरान, मारन अपने कर्तव्यों को भूलकर केवल आनंद लेने में मग्न रहता था। राजा को लगा कि मारन गंभीर जिम्मेदारियां नहीं निभा पाएगा।
अंत में, राजा ने इलंगो की परीक्षा ली। इलंगो एक बहुत ही नेक इंसान था। एक बार राज्य की सीमा पर संकट आ गया, जिससे इलंगो के अपने परिवार की जान खतरे में पड़ गई। कोई और होता तो डर कर भाग जाता, लेकिन इलंगो नहीं डरा। उसने अपने परिवार के प्रति डर से ऊपर उठकर अपने कर्तव्य को चुना और राज्य की रक्षा की योजना बनाई। उसने दिखाया कि उसका धर्म उसके प्राणों के मोह से बड़ा है।
राजा विक्रम ने इलंगो को अपना मंत्री चुन लिया। उन्होंने देखा कि इलंगो में धन और सुख के प्रति संयम है और वह मृत्यु के भय से ऊपर उठकर कर्तव्य निभाना जानता है।