चोज़पुरम के राजा विक्रम एक नए मंत्री की तलाश में थे। दो युवक, कधिर और मारन, इस पद के लिए चुने गए।
कधिर बहुत बुद्धिमान और चतुर था। वह किसी भी समस्या का समाधान पल भर में कर सकता था। लेकिन कधिर में एक बुराई थी—वह अपनी छोटी-छोटी गलतियों को छिपाने में माहिर था और अक्सर दूसरों को नीचा दिखाता था।
मारन एक साधारण और संस्कारी परिवार से था। वह शांत स्वभाव का था। एक बार महल के बगीचे में काम करते समय, मारन से गलती से एक कीमती फूलदान टूट गया। वहां कोई नहीं देख रहा था, लेकिन मारन के मन में ग्लानि हुई। उसने भागने के बजाय, खुद जाकर राजा के अधिकारी को अपनी गलती बताई और माफी मांगी। उसे डर था कि गलत काम करने से उसकी आत्मा को ठेस पहुंचेगी।
जब राजा ने उनका साक्षात्कार लिया, तो कधिर ने अपनी उपलब्धियों का बखान बहुत गर्व से किया। वहीं मारन ने विनम्रता से बताया कि वह अपने कर्तव्यों के प्रति कितना ईमानदार है और गलत काम करने के विचार से ही उसे डर लगता है।
राजा मुस्कुराए और मारन को मंत्री चुन लिया। राजा समझ गए कि कधिर के पास बुद्धि तो है, लेकिन मारन के पास चरित्र और ईमानदारी है। मारन को अच्छे संस्कारों वाले परिवार से आने वाला और अपनी गलतियों पर शर्म महसूस करने वाला व्यक्ति लगा।