चंद्रपुर के राजा विक्रम बहुत ही न्यायप्रिय शासक थे। एक बार उन्होंने अपने राजकोष की देखरेख के लिए एक भरोसेमंद अधिकारी नियुक्त करने का निर्णय लिया। तभी रोहन नाम का एक व्यक्ति दरबार में आया। रोहन बहुत ही बुद्धिमान था और गणित के कठिन सवालों को पलक झपकते ही हल कर देता था। लेकिन, राज्य में रोहन का कोई परिवार या रिश्तेदार नहीं था। वह बिल्कुल अकेला रहता था।
राजा विक्रम उसकी बुद्धिमत्ता से बहुत प्रभावित हुए। लेकिन राजा के सलाहकार माधव ने एक चेतावनी दी: 'महाराज, रोहन बुद्धिमान तो है, लेकिन जिसके कोई संबंधी नहीं होते, उसे समाज के डर का एहसास नहीं होता। जिस व्यक्ति का परिवार होता है, वह बदनामी के डर से गलत काम नहीं करता, लेकिन अकेले व्यक्ति को किसी बात का भय नहीं होता।'
राजा ने चेतावनी को अनसुना कर दिया और रोहन को नियुक्त कर दिया। कुछ महीनों बाद, राजकोष से भारी मात्रा में सोना गायब हो गया। रोहन ने अपनी चतुराई से इस चोरी को इतनी सफाई से छिपाया कि किसी को शक भी नहीं हुआ। क्योंकि रोहन का कोई परिवार नहीं था जिसे उसकी बदनामी का दुख होता, इसलिए उसे अपराध करने में कोई संकोच या डर नहीं लगा। अंत में, राजा विक्रम को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने सीखा कि किसी को चुनते समय केवल उसकी योग्यता ही नहीं, बल्कि उसकी सामाजिक जवाबदेही भी देखनी चाहिए।