सोलपुरा नामक एक सुंदर राज्य में राजकुमार मारन का शासन था। महल में कई लोग काम करते थे, जिनमें मारन के रिश्तेदार सोमू और रवि भी शामिल थे। सोमू हमेशा अपने रिश्ते का फायदा उठाकर विशेष लाभ पाने की कोशिश करता था, लेकिन वह अपने काम के प्रति गंभीर नहीं था।
दूसरी ओर, रवि एक शांत और मेहनती युवक था। एक बार राज्य के अनाज के भंडार के हिसाब में एक बड़ी गलती पाई गई। सोमू ने अपने रिश्ते का सहारा लेते हुए विनती की, 'मारन, मैं तुम्हारा रिश्तेदार हूँ, कृपया मुझे माफ कर दो।' लेकिन मारन ने केवल सोमू के रिश्ते को नहीं देखा।
मारन ने रवि और अन्य कर्मचारियों को बुलाया और जांच की। रवि ने अपनी गलती सुधारी और बहुत ही सटीक हिसाब तैयार किया। मारन ने रवि की योग्यता और ईमानदारी को पहचानते हुए उसे एक बड़ा पद दिया। इसे देखकर अन्य रिश्तेदारों को समझ आया कि केवल रिश्ता होने से सम्मान नहीं मिलता, बल्कि काबिलियत और ईमानदारी से सम्मान मिलता है। मारन ने अपने रिश्तेदारों को छोड़ा नहीं, बल्कि उन्हें उनकी योग्यता के अनुसार सम्मान दिया।