पहाड़ों के बीच बसे एक छोटे से गाँव में लियो नाम का एक लड़का रहता था। लियो बहुत प्रतिभाशाली था; उसकी पेंटिंग और उसके गीत पूरे गाँव में मशहूर थे। हर कोई उसकी प्रशंसा करता था।
लेकिन धीरे-धीरे लियो को अपनी प्रतिभा पर घमंड होने लगा। वह छोटी-छोटी बारीकियों पर ध्यान देना भूलने लगा। उसने सोचा, 'मैं तो पहले से ही बहुत अच्छा हूँ, मुझे रोज़ अभ्यास करने की क्या ज़रूरत है?'
एक बार गाँव में एक बड़ा उत्सव आयोजित किया गया। चित्रकला प्रतियोगिता जीतने वाले को एक बड़ा इनाम मिलना था। लियो बहुत उत्साहित था, लेकिन उसने अभ्यास करना छोड़ दिया। वह रंगों को सही ढंग से मिलाने और बारीकियों को समझने की मेहनत करना भूल गया।
प्रतियोगिता के दिन, लियो ने एक पेंटिंग बनाई। वह देखने में तो अच्छी थी, लेकिन उसमें वह गहराई और सफाई नहीं थी जो पहले हुआ करती थी। उसने वे तकनीकें भुला दी थीं जिनसे वह प्रसिद्ध हुआ था। अंत में, एक दूसरे लड़के ने प्रतियोगिता जीत ली। लियो बहुत उदास हो गया।
तभी उसके दादाजी ने उसे समझाया, 'लियो, जैसे गरीबी ज्ञान को नष्ट कर देती है, वैसे ही भूलने की आदत प्रसिद्धि को नष्ट कर देती है। यदि तुम अपने कर्तव्यों और अपनी कला की बारीकियों को भूल जाओगे, तो तुम्हारा सम्मान भी चला जाएगा।' उस दिन के बाद से लियो ने कभी लापरवाही नहीं की और हर काम पूरी सावधानी से करने लगा।