एक सुंदर से गाँव में आर्यन नाम का एक लड़का रहता था। आर्यन बहुत ही फुर्तीला था, लेकिन उसकी एक बुरी आदत थी—वह बिना सोचे-समझे हर काम बहुत जल्दबाजी में करता था।
एक बार गाँव में मिट्टी के बर्तनों की एक बड़ी प्रतियोगिता आयोजित की गई। आर्यन के पिता गाँव के सबसे कुशल कुम्हार थे। आर्यन भी अपनी कला दिखाना चाहता था और उसने प्रतियोगिता में भाग लेने का फैसला किया।
प्रतियोगिता शुरू होते ही आर्यन ने बहुत तेज़ी से काम करना शुरू कर दिया। वह चाहता था कि वह सबसे पहले अपना काम पूरा कर ले ताकि सब उसकी प्रशंसा करें। उसकी सहेली मीरा ने उसे टोकते हुए कहा, 'आर्यन, थोड़ा धीरे चलो। अगर तुम बहुत जल्दी करोगे, तो मिट्टी में कोई कमी रह सकती है।' आर्यन ने हँसते हुए कहा, 'मीरा, जीत उसी की होती है जो सबसे तेज़ होता है!' और वह अपनी धुन में लगा रहा।
जल्दबाजी के चक्कर में आर्यन ने मिट्टी के बर्तन के निचले हिस्से में एक छोटा सा छेद नहीं देखा। उसने बिना ध्यान दिए बर्तन को सुंदर आकार दे दिया और उसे पूरा कर लिया। जब बर्तन को सजाने के लिए रखा गया, तभी अचानक एक आवाज़ आई और वह बर्तन बीच से टूटकर बिखर गया। आर्यन की सारी मेहनत बेकार हो गई।
शाम को आर्यन बहुत दुखी था। उसके पिता उसके पास आए और बोले, 'बेटा, केवल हुनर काफी नहीं है, काम करते समय धैर्य और सोच-विचार भी ज़रूरी है। बिना सोचे-समझे किया गया काम कभी भी स्थायी सम्मान नहीं दिला सकता।' आर्यन को अपनी गलती समझ आ गई। उस दिन के बाद, उसने हर काम को बहुत सोच-समझकर और सावधानी से करना शुरू कर दिया।