एक सुंदर गाँव में रामू नाम का एक किसान रहता था। उसके पास बहुत उपजाऊ खेत और अच्छी फसल थी। उसने अपनी मेहनत से बहुत संपत्ति बनाई थी और वह अपने जीवन से खुश था।
लेकिन उस राज्य का राजा बहुत निर्दयी था। उसे प्रजा की भलाई से कोई मतलब नहीं था, उसे बस अधिक कर (tax) वसूलने से मतलब था। एक साल गाँव में भीषण सूखा पड़ा। रामू की सारी फसलें बर्बाद हो गईं। उसके पास खाने तक के लिए अनाज नहीं बचा।
तभी राजा के अधिकारी रामू के पास आए और बोले, 'तुम्हारी जमीन बहुत बड़ी है, इसलिए तुम्हें सामान्य से दोगुना कर देना होगा।' रामू बहुत दुखी हुआ। उसने अपनी पत्नी सीता से कहा, 'अगर मैं गरीब होता, तो शायद कम से कम चैन से सो पाता। लेकिन इस संपत्ति के कारण, मुझे इस अत्याचारी राजा से इसे बचाने के लिए हर दिन लड़ना पड़ता है। यह संपत्ति मुझे खुशी देने के बजाय केवल डर और दुख दे रही है।'
रामू को समझ आ गया कि एक अन्यायपूर्ण राजा के शासन में, संपत्ति का होना गरीबी से भी अधिक कष्टदायक होता है।