एक सुंदर से गाँव में लियो नाम का एक लड़का अपने पिता श्री सोहन के साथ रहता था। सोहन गाँव के बहुत बड़े व्यापारी थे। उनके पास बहुत सारी ज़मीन, सोना और कीमती चीज़ें थीं। लियो को अपनी अमीरी पर बहुत गर्व था। वह अक्सर कहता, 'हम बहुत भाग्यशाली हैं, हमारे पास सब कुछ है!'
लेकिन समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता। एक साल व्यापार में भारी नुकसान हुआ और धीरे-धीरे सोहन की सारी संपत्ति कम होने लगी। एक दिन लियो बहुत उदास होकर बैठ गया। उसने रोते हुए अपने पिता से पूछा, 'पिताजी, अब हमारे पास कुछ नहीं बचा। क्या हम गरीब हो गए हैं?'
सोहन ने लियो का हाथ थामकर बड़े प्यार से समझाया, 'बेटा, धन तो आता-जाता रहता है। यह आज है और कल नहीं रहेगा। लेकिन जो तुम सीख रहे हो, तुम्हारी मेहनत और तुम्हारी हिम्मत—यही तुम्हारी असली संपत्ति है। इसे कोई तुमसे छीन नहीं सकता।'
लियो को बात समझ आ गई। उसने धन के खोने का शोक मनाना छोड़ दिया और अपनी पढ़ाई और कौशल (skills) पर ध्यान देना शुरू किया। अपनी बुद्धि और दृढ़ संकल्प के बल पर, लियो ने फिर से सफलता प्राप्त की और एक सम्मानित व्यक्ति बना।