एक सुंदर गाँव में मारन और उसके पिता सोमू रहते थे। सोमू एक बहुत ही कुशल कुम्हार थे। लेकिन मारन बहुत आलसी था। उसका पसंदीदा वाक्य था, 'कल कर लेंगे।' एक दिन गाँव के मुखिया ने एक प्रतियोगिता की घोषणा की: 'जो सबसे सुंदर कलाकृति बनाएगा, उसे गाँव का सम्मान और सोने के सिक्के दिए जाएंगे।'
मारन भी प्रतियोगिता में भाग लेना चाहता था, लेकिन वह काम करने के बजाय पेड़ की छाया में सोता रहता था। उसके पिता सोमू ने उसे समझाया, 'बेटा, तुम्हारा हुनर हमारे परिवार का नाम रोशन कर सकता है, लेकिन आलस इसे मिटा सकता है। अगर तुम आज मेहनत करोगे, तभी कल तुम्हारा नाम होगा।' मारन ने पहले तो उनकी बात नहीं मानी। लेकिन जब प्रतियोगिता का दिन करीब आया और उसने दूसरों को मेहनत करते देखा, तो उसे अपनी गलती का अहसास हुआ।
उस रात मारन सोया नहीं। उसने अपनी पूरी शक्ति लगाकर एक बहुत ही सुंदर मिट्टी का पात्र बनाया। अगले दिन जजों ने जब उसकी कला देखी, तो वे दंग रह गए। मारन प्रतियोगिता जीत गया! उसकी इस जीत ने पूरे परिवार को गर्व से भर दिया। उस दिन के बाद से मारन ने आलस को हमेशा के लिए त्याग दिया और एक मेहनती इंसान बन गया।