एक शांत गाँव में कविन नाम का एक लड़का रहता था। उसे चित्रकारी करना बहुत पसंद था। एक दिन, उसके दादाजी ने उसे एक पुराना लकड़ी का बक्सा दिया। उसमें एक बहुत ही सुंदर लेकिन बहुत कठिन चित्र बनाने वाला कागज़ था। दादाजी ने पूछा, 'कविन, क्या तुम इसे बना सकते हो?'
कविन ने उस चित्र को देखा। उसमें एक विशाल पर्वत, घने जंगल और एक झरना बहुत बारीकी से बनाया गया था। 'यह बहुत मुश्किल है दादाजी, मैं यह नहीं कर सकता!' कविन ने निराश होकर कहा।
दादाजी मुस्कुराए और बोले, 'कविन, यह कहकर हार मत मानो कि यह बहुत कठिन है। तुम बस कोशिश करना शुरू करो। तुम्हारी मेहनत ही तुम्हें वह महानता और कौशल देगी जिसकी तुम्हें इस काम को पूरा करने के लिए ज़रूरत है।'
कविन ने धीरे से ब्रश उठाया। उसने एक छोटी सी लकीर से शुरुआत की। फिर एक पत्ता, फिर एक पत्थर और फिर एक बादल। घंटों बीत गए। उसके हाथ थक गए, आँखें भारी होने लगीं, लेकिन उसने हार नहीं मानी। धीरे-धीरे, वह विशाल पर्वत उसके कागज़ पर उभरने लगा।
शाम तक, एक अद्भुत चित्र उसके सामने था। कविन अब एक कुशल कलाकार बन गया था। उसने खुशी से कहा, 'जब मैंने सोचा कि यह कठिन है, तब मैं डर गया था, लेकिन जब मैंने प्रयास किया, तब मुझे समझ आया कि मैं इसे कर सकता हूँ।'