एक सुंदर से गाँव में कार्तिक नाम का एक लड़का रहता था। वह अपने पिता की लकड़ी के काम की दुकान में हाथ बँटाता था। कार्तिक का दोस्त रोहन था, जो किसी भी कठिन काम से घबरा जाता था। एक बार गाँव के उत्सव के लिए एक बड़ी लकड़ी की मूर्ति बनाने का काम कार्तिक के पिता को मिला। काम बहुत मेहनत वाला था। कार्तिक के हाथों में दर्द होने लगा और वह थक गया। रोहन ने कहा, "कार्तिक, यह बहुत मुश्किल है, छोड़ दो! चलो खेलते हैं।" लेकिन कार्तिक मुस्कुराया और बोला, "यह दर्द ही हमें एक बेहतर कलाकार बनाएगा, यह तो एक चुनौती है!"
कार्तिक ने दर्द को अपना दुश्मन नहीं, बल्कि अपना साथी माना। उसने पूरी लगन से काम किया। जब मूर्ति बनकर तैयार हुई, तो वह इतनी सुंदर थी कि सब देखते रह गए। जो लोग पहले कार्तिक का मज़ाक उड़ाते थे, वे भी दंग रह गए। यहाँ तक कि रोहन ने भी कहा, "कार्तिक, तुम वाकई में बहुत महान हो!" कार्तिक ने मुश्किलों को खुशी-खुशी स्वीकार किया, इसीलिए उसे सबका सम्मान मिला।