चंद्रपुर नाम के एक सुंदर राज्य में विक्रम नाम का एक युवा राजा राज करता था। विक्रम बहुत दयालु था, लेकिन नया राजा होने के कारण वह अपने मंत्रियों को पूरी तरह नहीं जानता था। उसका सबसे करीबी मंत्री सोमेश था। सोमेश हमेशा राजा की प्रशंसा करता था, लेकिन उसके मन में एक काला विचार था। वह राज्य के खजाने को धीरे-धीरे अपने परिवार के लिए चुराने की योजना बना रहा था।
एक दिन खबर आई कि पड़ोसी राज्य की एक बड़ी सेना सीमा पर आ रही है। विक्रम घबरा गया। सोमेश ने तुरंत सलाह दी, "महाराज, वे दुश्मन बहुत शक्तिशाली हैं। उनसे लड़ने के बजाय, हमें उन्हें बहुत सारा सोना देकर वापस भेज देना चाहिए। यह सुरक्षित रहेगा।" विक्रम सोच में पड़ गया। उसे लगा कि युद्ध में जान जा सकती है, लेकिन उसे सोमेश की बातों पर संदेह भी हुआ।
जैसे-जैसे दिन बीतते गए, सोमेश राज्य की सुरक्षा को कमजोर करने के लिए गलत सुझाव देने लगा। एक रात, विक्रम को सोमेश का एक गुप्त पत्र मिला। उस पत्र में सोमेश दुश्मनों के साथ मिलकर राज्य को कैसे बर्बाद कर सकता है, इसकी पूरी योजना लिखी थी। विक्रम का दिल टूट गया। उसे समझ आ गया कि बाहर के दुश्मन से लड़ना आसान है, लेकिन अगर बगल में बैठा मंत्री ही गद्दार हो, तो राजा को कोई नहीं बचा सकता।
विक्रम ने तुरंत अपने वफादार सैनिकों को इकट्ठा किया, दुश्मनों को हराया और सोमेश को उसके धोखे के लिए दंडित किया। विक्रम ने सीख लिया कि बाहर के करोड़ों दुश्मनों से कहीं ज्यादा खतरनाक वह एक मंत्री है जो आपके साथ रहकर आपको नष्ट करने की सोचता है।