एक सुंदर पहाड़ी गाँव में अरुवी नाम की एक लड़की अपने पिता सोमू के साथ रहती थी। सोमू गाँव के मुखिया का एक भरोसेमंद सलाहकार था। एक दिन, दो किसानों के बीच ज़मीन को लेकर बड़ा विवाद हो गया। मुखिया ने सोमू से मामले को सुलझाने के लिए कहा।
सोमू सोच ही रहा था कि अरुवी दौड़कर आई और बोली, 'पिताजी, सब कह रहे हैं कि वह किसान लालची है!' जल्दबाजी में और बिना पूरी सच्चाई जाने, सोमू ने कह दिया, 'शायद वह किसान ही गलत है।' यह खबर पूरे गाँव में आग की तरह फैल गई।
अगली सुबह पता चला कि वह किसान निर्दोष था। सोमू के एक गलत शब्द ने किसान की इज़्ज़त मिट्टी में मिला दी और गाँव वालों का सोमू से भरोसा उठ गया। सोमू को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने अरुवी से कहा, 'बेटी, शब्द बीज की तरह होते हैं। वे फूल भी खिला सकते हैं और कांटे भी उगा सकते हैं। एक सलाहकार के रूप में, मुझे अपने शब्दों का बहुत ध्यान रखना होगा।' उस दिन के बाद से, सोमू हमेशा बोलने से पहले सोचता था।