एक सुंदर से गाँव में करिकालन नाम का एक लड़का रहता था। उसे बागवानी का बहुत शौक था। एक दिन उसने सोचा कि गाँव के बीचों-बीच एक बहुत ही सुंदर फव्वारा बनाया जाए।
उसका दोस्त मारन बोला, "करिकालन, यह तो बहुत मुश्किल काम है! तुम्हें पहाड़ियों से भारी पत्थर लाने होंगे, धूप और बारिश में काम करना होगा। इतनी मेहनत क्यों करना?"
करिकालन ने बिना सोचे-समझे काम शुरू नहीं किया। उसने पहले यह सोचा कि इस काम में कितनी मेहनत और समय लगेगा। फिर उसने उन बाधाओं के बारे में सोचा जो रास्ते में आ सकती थीं, जैसे ऊबड़-खाबड़ रास्ते और बारिश का मौसम। अंत में, उसने उस लाभ के बारे में सोचा जो इस फव्वारे से गाँव वालों को मिलेगा—गाँव की सुंदरता और बच्चों की खुशी।
उसने धीरे-धीरे और योजना बनाकर काम किया। वह हर हफ्ते थोड़े-थोड़े पत्थर और औजार इकट्ठा करता गया। जब बारिश आई और रास्ते खराब हुए, तो वह घबराया नहीं क्योंकि उसने पहले ही इसके लिए तैयारी कर ली थी। अंत में, फव्वारा बनकर तैयार हो गया। गाँव वाले बहुत खुश थे। करिकालन की समझदारी और योजना ने उसके सपने को सच कर दिया।