प्राचीन काल में करिकालन नाम का एक न्यायप्रिय राजा था। राजा की एक बड़ी इच्छा थी: अपने राज्य की सीमा पर स्थित एक बंजर और सूखी ज़मीन को एक सुंदर हरे-भरे बगीचे में बदलना। लेकिन वह ज़मीन बहुत कठोर और पथरीली थी।
राजा के भरोसेमंद मंत्री मारन बहुत बुद्धिमान थे। एक दिन राजा ने मारन से पूछा, "मारन, क्या हम उस सूखी ज़मीन को बगीचा बना सकते हैं?"
मारन सच्चाई जानते थे। उन्हें पता था कि वहाँ खुदाई करना बहुत कठिन होगा। वे आसानी से कह सकते थे, "महाराज, यह असंभव है," ताकि उन्हें कोई काम न करना पड़े। लेकिन मारन जानते थे कि एक मंत्री का काम राजा की इच्छा को दबाना नहीं, बल्कि उसे पूरा करने का रास्ता दिखाना है।
मारन ने कहा, "महाराज, आपका विचार बहुत महान है। लेकिन अगर हम ज़मीन को खोदने के बजाय, पास की पहाड़ियों से आने वाली छोटी धाराओं का रुख उस ज़मीन की ओर मोड़ दें, तो वह स्थान अपने आप उपजाऊ हो जाएगा।"
राजा को यह विचार बहुत पसंद आया। मारन की सलाह मानकर जब धाराओं का रुख मोड़ा गया, तो वह बंजर ज़मीन एक सुंदर बगीचे में बदल गई। इस बगीचे से राज्य की समृद्धि बढ़ी। राजा की इच्छा को छिपाने के बजाय, उसे पूरा करने का मार्ग दिखाने के कारण मारन ने राजा का अटूट सम्मान और स्नेह प्राप्त किया।