प्राचीन काल में चोल साम्राज्य में करिकालन नाम का एक राजा शासन करता था। उसके सबसे भरोसेमंद मंत्री का नाम धर्म था। धर्म बहुत ही ईमानदार और बुद्धिमान व्यक्ति था। एक बार राज्य में एक बड़े बांध का निर्माण कार्य शुरू हुआ, जिसका सारा हिसाब-किताब धर्म के हाथों में था।
एक दिन एक व्यापारी ने धर्म के कान में कहा, "धर्म, अगर हम हिसाब में थोड़ी हेराफेरी कर दें, तो हमें बहुत लाभ होगा। राजा को कभी पता नहीं चलेगा।" धर्म ने तुरंत मना कर दिया। लेकिन धर्म के एक सहायक, रवि ने सोचा, "थोड़ी सी ही तो गलती है, राजा को क्या पता चलेगा?" और उसने हिसाब में हेराफेरी कर दी।
लेकिन राजा करिकालन बहुत ही चतुर और पारखी थे। कुछ ही दिनों में उन्हें गड़बड़ी का पता चल गया। रवि बहुत डर गया। वह राजा के पास गया, रोया और बहुत माफी मांगी। उसने कहा कि वह सब ठीक कर देगा। लेकिन राजा के मन में रवि के प्रति संदेह का बीज बोया जा चुका था। रवि ने चाहे कितनी भी सफाई दी, राजा का संदेह दूर नहीं हुआ। रवि ने अपना पद और सम्मान दोनों खो दिए।
धर्म यह सब देखकर दुखी हुआ। उसने समझ लिया कि एक बार विश्वास टूट जाए, तो उसे जोड़ना लगभग असंभव है।