पुराने समय में वीरपांडियन नाम का एक प्रतापी राजा था। उसके दरबार में कई मंत्री थे, लेकिन युवा मंत्री इलंगोवन के पास एक अद्भुत शक्ति थी। वह लोगों की बातों से ज़्यादा उनकी आँखों को पढ़कर उनके मन की बात समझ लेता था।
एक बार पड़ोसी राज्य का राजा करिकालन दावत के लिए आया। करिकालन बहुत ही मीठा बोलने वाला और मुस्कुराता हुआ व्यक्ति था। वह बार-बार कहता, 'आपसे मित्रता करके मुझे बहुत प्रसन्नता हो रही है!' सबको वह बहुत भला लगा, लेकिन इलंगोवन ने कुछ और ही देखा। करिकालन के शब्द तो मीठे थे, पर उसकी आँखों में एक अजीब सी कड़वाहट और चालाकी थी। जब वह बात करता, तो उसकी आँखों में पल भर के लिए नफरत की झलक दिखाई देती थी।
राजा वीरपांडियन ने इलंगोवन से पूछा, 'वह तो बहुत नेक इंसान लग रहा है, है ना?' इलंगोवन ने धीरे से कहा, 'महाराज, शब्द झूठ बोल सकते हैं, लेकिन आँखें नहीं। उसकी आँखें मित्रता नहीं, बल्कि एक षड्यंत्र दिखा रही हैं।'
इलंगोवन की बात मानकर राजा ने अपनी सुरक्षा बढ़ा दी। कुछ ही दिनों बाद, करिकालन ने चुपके से हमला करने की योजना बनाई, लेकिन राजा पहले से तैयार था, इसलिए उसकी योजना विफल हो गई। अपनी गलती का एहसास होने पर करिकालन ने माफी मांगी। राजा समझ गया कि आँखों की भाषा समझने वाला मंत्री किसी भी सेना से बड़ा धन है।