बहुत समय पहले, हरियाली से भरे खेतों वाला एक सुंदर गाँव था, जिसका नाम 'आनंदपुर' था। गाँव के मुखिया, रामदीन जी, एक बहुत ही ईमानदार व्यक्ति थे।
आनंदपुर में अर्जुन नाम का एक किसान रहता था। अर्जुन बहुत मेहनती था। उसे पता था कि फसलों को बिना किसी नुकसान के कैसे लहलहाना है। एक साल गाँव में भयंकर सूखा पड़ा। जहाँ अन्य किसान हार मान चुके थे, वहीं अर्जुन ने हिम्मत नहीं हारी। उसने कड़ी मेहनत करके दूर की नदी से खेतों तक पानी पहुँचाने के लिए छोटी नहरें बनाईं। उसकी मेहनत रंग लाई और खेत फिर से हरे-भरे हो गए।
उसी गाँव में मीरा नाम की एक लड़की रहती थी। मीरा अपने अच्छे चरित्र के लिए जानी जाती थी। एक बार गाँव के अनाज भंडार में कुछ अनाज कम पाया गया। किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया, लेकिन मीरा ने अपनी ईमानदारी दिखाते हुए उस कमी को पूरा करने में मदद की और सच्चाई का साथ दिया। उसकी नेकदिली ने सबको प्रेरित किया।
एक बार एक राजकुमार उस गाँव से गुजरा। वहाँ की भरपूर खेती और लोगों के ऊँचे चरित्र को देखकर वह दंग रह गया। उसने कहा, 'एक सच्चा राज्य केवल धन से नहीं, बल्कि भरपूर फसलों और नेक लोगों से बनता है।'
तब से आनंदपुर गाँव एक आदर्श राष्ट्र की पहचान बन गया।