एक सुंदर राज्य में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। उसका सपना एक महान सेनापति बनने का था। एक बार, राजा ने एक बहुत बड़ा उत्सव आयोजित किया और सुरक्षा के लिए कुछ स्वयंसेवकों को चुना। अर्जुन और उसका मित्र विक्रम भी इस समूह का हिस्सा बने।
तैयारी के दौरान, विक्रम हमेशा कहता था, "हमें और अधिक लोगों की ज़रूरत है, जितने ज़्यादा लोग होंगे, हम उतने ही शक्तिशाली होंगे!" लेकिन अर्जुन का मानना कुछ और था। उसने कहा, "सिर्फ संख्या से कुछ नहीं होता विक्रम। हमारे पास सही उपकरण, पर्याप्त संसाधन और सबसे महत्वपूर्ण बात, एक-दूसरे का साथ देने का साहस होना चाहिए।"
उत्सव के दिन, अचानक तेज़ तूफान आ गया और चारों ओर अफरा-तफरी मच गई। लोग डर कर भागने लगे। विक्रम डर के मारे जम गया, लेकिन अर्जुन की टीम बिना डरे काम पर लग गई। क्योंकि उन्होंने पहले से ही सब कुछ व्यवस्थित कर रखा था और वे एक टीम की तरह काम करने के लिए तैयार थे, उन्होंने बिना किसी घबराहट के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया।
जब तूफान शांत हुआ, तो राजा ने अर्जुन की टीम की प्रशंसा की। राजा ने कहा, "एक राजा की असली संपत्ति केवल बड़ी भीड़ नहीं, बल्कि एक पूर्ण और निडर टीम है जो हर चुनौती का सामना कर सके।"