एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। उसे धनुषविद्या का बहुत शौक था। उसके पिता, विक्रम, एक बहुत ही बहादुर शिकारी थे। एक दिन, अर्जुन ने अपनी पहली बड़ी चुनौती के लिए तैयारी की। उसने झाड़ियों में एक छोटा खरगोश देखा। वह बहुत ही आसान लक्ष्य था। अर्जुन ने निशाना साधा और तीर छोड़ा। तीर सीधे खरगोश को लगा। अर्जुन खुशी से झूम उठा। लेकिन उसके पिता उसे देख रहे थे। उन्होंने अर्जुन के पास आकर कहा, 'बेटा, एक छोटे खरगोश को मारना आसान है और इससे तुम्हें थोड़ी खुशी मिल सकती है। लेकिन याद रखना, जंगल में एक विशाल हाथी पर निशाना साधकर अगर तीर चूक भी जाए, तो उस साहस का सम्मान एक खरगोश को मारने से कहीं अधिक होता है।'
कुछ दिनों बाद, गाँव के पास एक विशाल जंगली हाथी दिखाई दिया। सभी ग्रामीण डर गए, लेकिन अर्जुन डरा नहीं। उसने अपना धनुष उठाया और उस शक्तिशाली हाथी पर निशाना साधा। उसने पूरी ताकत से तीर छोड़ा, लेकिन हाथी फुर्ती से हट गया और तीर चूक गया। गाँव वाले कहने लगे, 'अर्जुन हार गया!' लेकिन विक्रम ने अर्जुन को गले लगा लिया और कहा, 'आज तुम किसी छोटे शिकार के पीछे नहीं भागे, बल्कि तुमने एक महान चुनौती का सामना किया। उस हाथी के सामने खड़े होने का तुम्हारा साहस ही तुम्हारी असली जीत है।' अर्जुन समझ गया कि छोटी सफलताओं से कहीं बढ़कर बड़े लक्ष्यों के लिए प्रयास करना है।