एक सुंदर से गाँव में कवि और रोहन नाम के दो दोस्त रहते थे। कवि बहुत ही शांत और समझदार लड़का था, जबकि रोहन चंचल था और हमेशा अपनी मनमानी करता था।
एक बार गाँव में बहुत तेज़ बारिश हुई। कवि ने देखा कि उसके घर की छत से पानी टपक रहा है। जब वह उसे ठीक करने की कोशिश कर रहा था, तब रोहन आया और बोला, 'कवि, छत की चिंता छोड़ो, चलो बारिश में खेलते हैं!' कवि ने विनम्रता से कहा, 'नहीं रोहन, अगर मैंने इसे अभी ठीक नहीं किया, तो घर में पानी भर जाएगा। हम बाद में खेलेंगे।'
रोहन को कवि की यह बात अच्छी नहीं लगी और वह चिढ़कर चला गया। कुछ दिनों बाद, जब कवि को एक छोटी सी मदद की ज़रूरत थी, उसने रोहन को बुलाया। लेकिन रोहन ने कहा, 'मेरे पास खेलने का समय है, तुम खुद देख लो।' रोहन की दोस्ती पूर्णिमा के चाँद की तरह थी—शुरुआत में बहुत चमकदार, लेकिन मुश्किल आते ही गायब हो गई।
दूसरी ओर, कवि का एक और दोस्त था, अर्जुन। अर्जुन बहुत ही बुद्धिमान और धैर्यवान था। जब कवि मुश्किल में था, अर्जुन ने उसका साथ दिया। समय बीतने के साथ, कवि और अर्जुन की दोस्ती और भी गहरी होती गई। उनकी दोस्ती बढ़ते हुए चाँद की तरह थी, जो हर दिन और अधिक उज्ज्वल और मजबूत होती जा रही थी।
कवि समझ गया कि सच्चे दोस्त मुसीबत में साथ नहीं छोड़ते, बल्कि वक्त के साथ उनका रिश्ता और भी गहरा हो जाता है।