एक सुंदर से गाँव में कविन नाम का एक लड़का रहता था। उसके बहुत से दोस्त थे, लेकिन उनमें से एक दोस्त था रवि। रवि दिखने में तो बहुत अच्छा था, पर उसमें एक बड़ी कमी थी—वह मुश्किल समय में कभी किसी का साथ नहीं देता था।
एक दिन कविन अपनी नई साइकिल ठीक करने की कोशिश कर रहा था। उसने रवि से कहा, "रवि, क्या तुम मेरी मदद करोगे? हम दोनों मिलकर इसे ठीक कर सकते हैं!" रवि ने मुस्कुराते हुए वादा किया, "हाँ कविन, मैं ज़रूर तुम्हारी मदद करूँगा!"
लेकिन जैसे ही कविन ने काम शुरू किया, रवि खेलने चला गया और कविन को अकेला छोड़ दिया। कुछ दिनों बाद, कविन को स्कूल का एक बहुत ज़रूरी प्रोजेक्ट पूरा करना था। उसने रवि से मदद मांगी थी, क्योंकि रवि ने वादा किया था। लेकिन जब काम का समय आया, तो रवि बहाने बनाने लगा और कविन को परेशान होते हुए देखता रहा। कविन को सारा काम अकेले ही करना पड़ा।
उस समय कविन को समझ आया कि रवि जैसे दोस्तों के साथ रहने से केवल मानसिक तनाव और परेशानी ही मिलती है। जो दोस्त ज़रूरत पड़ने पर साथ न दे सकें, उनसे दोस्ती करने से बेहतर है कि इंसान अकेला रहे।