एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। उसका सबसे अच्छा दोस्त रोहन था। रोहन हमेशा बड़े-बड़े वादे करता था कि वह अर्जुन की हर काम में मदद करेगा। एक बार गाँव के बच्चों ने मिलकर लकड़ी का एक बड़ा खेल का घर बनाने का फैसला किया। अर्जुन ने पूछा, 'रोहन, क्या तुम मेरी मदद करोगे?' रोहन ने उत्साह से कहा, 'हाँ अर्जुन, मैं ज़रूर करूँगा!'
लेकिन जब काम शुरू हुआ, तो रोहन का व्यवहार बदल गया। जब भी कोई भारी काम आता, रोहन बहाने बनाने लगता—कभी सिर दर्द, तो कभी हाथ में दर्द। रोहन के पास मदद करने की क्षमता थी, लेकिन वह ऐसा नाटक करता जैसे वह कुछ कर ही नहीं सकता। अर्जुन को बुरा लगा, लेकिन वह रोहन से झगड़ा नहीं करना चाहता था.
अर्जुन ने एक समझदारी भरा रास्ता चुना। उसने रोहन से बहस करने या उसे बुरा-भला कहने के बजाय, धीरे-धीरे उससे दूरी बनाना शुरू कर दिया। उसने रोहन को बिना बताए अपने दूसरे दोस्तों के साथ मिलकर काम पूरा कर लिया। बिना किसी शोर-शराबे या लड़ाई के, अर्जुन उस झूठी दोस्ती से बाहर निकल आया और अपनी शांति बनाए रखी।