एक सुंदर से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। अर्जुन बहुत ही सरल और सच्चा लड़का था। उसके स्कूल में रोहन नाम का एक छात्र था। रोहन हमेशा अर्जुन के साथ रहता, उसकी तारीफ करता और उसके साथ खेलता। अर्जुन ने रोहन को अपना सबसे अच्छा दोस्त मान लिया था।
एक बार स्कूल में चित्रकला प्रतियोगिता हुई। जीतने वाले को रंगों का एक सुंदर सेट मिलना था। अर्जुन ने बहुत मेहनत से एक चित्र बनाया। तभी रोहन उसके पास आया और बोला, 'अर्जुन, यह बहुत सुंदर है! तुम ज़रूर जीतोगे!' लेकिन यह कहते हुए रोहन ने चालाकी से अर्जुन के चित्र के एक कोने पर काला धब्बा लगा दिया। अर्जुन को इसका पता नहीं चला।
जब परिणाम आए, तो अर्जुन हार गया। दुखी होकर चलते समय अर्जुन ने सुना कि रोहन दूसरे बच्चों से कह रहा था, 'अर्जुन का चित्र ठीक था, पर उसमें कोई हुनर नहीं है।' अर्जुन को समझ आ गया कि रोहन का प्यार सच्चा नहीं था, वह तो बस एक दिखावा था। रोहन एक ऐसा दोस्त था जो पीठ पीछे वार करने के लिए सही मौके का इंतज़ार कर रहा था। अर्जुन ने सीख लिया कि बिना प्रेम वाला मित्रता एक हथियार की तरह होती है जो सही अवसर मिलने पर चोट पहुँचाती है।