एक शांत गाँव में आर्यन नाम का एक नेक दिल युवक रहता था। आर्यन बहुत दयालु था, लेकिन उसकी एक कमी थी कि वह लोगों पर बहुत जल्दी भरोसा कर लेता था। उसी गाँव में विक्रम नाम का एक व्यक्ति रहता था। विक्रम हमेशा आर्यन की बहुत प्रशंसा करता था। जब भी वे मिलते, विक्रम झुककर कहता, 'आर्यन, तुम मेरे भाई जैसे हो, तुम्हारे लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ।' बात करते समय उसकी आँखों में आँसू भी आ जाते थे, जिसे देखकर आर्यन को लगता कि वह बहुत सच्चा मित्र है।
एक बार आर्यन ने अपनी सारी जमापूंजी एक छोटी सी पेटी में रखी थी। विक्रम उसके पास आया और बहुत दुखी होकर बोला, 'मेरे प्रिय मित्र, तुम्हारी परेशानियों को देखकर मेरा दिल रो रहा है। क्यों न मैं तुम्हारा यह धन अपने घर में सुरक्षित रख दूँ?' विक्रम की आँखों में आँसू देखकर आर्यन को उस पर पूरा भरोसा हो गया और उसने पैसे उसे सौंप दिए।
कुछ दिनों बाद, विक्रम गायब हो गया। जब आर्यन ने उसे ढूँढा, तो पता चला कि विक्रम सारा पैसा लेकर दूसरे शहर भाग गया है। विक्रम के वे आँसू और उसकी मीठी बातें वास्तव में आर्यन को धोखा देने के हथियार थे। जिस हाथ से वह आर्यन का सम्मान कर रहा था, उसी हाथ से उसने आर्यन को लूट लिया था।