एक छोटे से गाँव में अर्जुन और विक्रम नाम के दो पक्के दोस्त रहते थे। वे हमेशा साथ रहते थे, लेकिन समय के साथ विक्रम का व्यवहार बदलने लगा। जब भी अर्जुन को मदद की ज़रूरत होती, विक्रम बहाने बनाने लगता। जब वे मिलते, तो विक्रम के चेहरे पर कोई खुशी नहीं होती थी। अर्जुन समझ गया कि अब वह दोस्ती पहले जैसी नहीं रही; वह अब केवल दिखावा थी।
अर्जुन को दुख तो हुआ, लेकिन उसने लड़ने या झगड़ा करने का फैसला नहीं किया। उसने एक अलग रास्ता चुना। जब भी विक्रम सामने आता, अर्जुन उसके साथ मुस्कुराकर और प्यार से बात करता, जैसे वे अभी भी अच्छे दोस्त हों। लेकिन अपने मन के भीतर, अर्जुन ने विक्रम पर से अपना भरोसा और गहरा लगाव हटा लिया। उसने बाहर से तो मित्रता निभाई, पर मन से उस रिश्ते को खत्म कर दिया। इस तरह अर्जुन ने बिना किसी कड़वाहट के अपनी शांति बनाए रखी।