एक सुंदर से गाँव में कविन नाम का एक लड़का रहता था। उसे मीठा बहुत पसंद था। एक दिन उसकी माँ ने कहा, "कविन, मैंने मेहमानों के लिए रसोई में ऊँचे जार में शहद वाली मिठाइयाँ रखी हैं। अभी उन्हें मत छूना।" कविन ने बात मान ली।
लेकिन उस शाम जब उसका दोस्त रवि आया, तो कविन के मन में एक शरारत सूझी। 'माँ को पता नहीं चलेगा, बस एक मिठाई खा लेता हूँ,' उसने सोचा। उस वर्जित मिठाई को खाने में उसे एक अजीब सा रोमांच महसूस हुआ। उसे मिठाई के स्वाद से ज़्यादा, नियम तोड़ने में मज़ा आने लगा। वह चोरी-छिपे मिठाई खाने को अपना पसंदीदा काम समझने लगा।
धीरे-धीरे, कविन को नियमों को तोड़ने में ही असली खुशी मिलने लगी। एक दिन, जब वह चुपके से मिठाई निकालने की कोशिश कर रहा था, उसका हाथ जार से टकरा गया और जार ज़मीन पर गिरकर टूट गया। सारी मिठाइयाँ बिखर गईं।
उसकी माँ दौड़कर आईं। कविन रोने लगा, लेकिन अपनी गलती के लिए नहीं, बल्कि इसलिए क्योंकि अब उसे वह 'चोरी करने वाला मज़ा' नहीं मिल पा रहा था। तब उसके पिता ने समझाया, "कविन, गलती करना इंसान की फितरत है, लेकिन गलत काम करने में ही आनंद ढूँढना सबसे बड़ी मूर्खता है।"