एक छोटे से गाँव में आर्यन नाम का एक लड़का रहता था। आर्यन बहुत चंचल था, लेकिन उसे एक बुरी आदत थी—वह सोचता था कि उसे सब कुछ पता है। एक दिन, गाँव के सबसे बुजुर्ग दादाजी रामलाल बरगद के पेड़ के नीचे बैठे थे। आर्यन दौड़कर उनके पास गया और बोला, "दादाजी, मुझे दुनिया की हर चीज़ का ज्ञान है!"
दादाजी मुस्कुराए और बोले, "अच्छा! तो बताओ आर्यन, एक पौधे को बढ़ने के लिए क्या चाहिए?"
आर्यन ने बिना सोचे कहा, "पौधे को कुछ नहीं चाहिए, जब मैं गाना गाता हूँ, तो वह अपने आप बढ़ जाता है!"
दादाजी ने समझाने की कोशिश की, "नहीं बेटा, सूरज की रोशनी के बिना पौधा मुरझा जाएगा।"
आर्यन ने मुँह बनाया और बोला, "दादाजी, आपको नहीं पता, मैं जो कहता हूँ वही सच है!" और वह वहाँ से चला गया।
कुछ दिनों बाद, जब आर्यन ने देखा कि उसका पौधा सूख रहा है, तो उसने अपनी गलती मानने के बजाय अपने दोस्तों से कहा, "पौधा मेरे गाने से इतना खुश हुआ कि उसने खुशी में सिर झुका लिया है!"
दादाजी दूर से यह देख रहे थे। उन्होंने सोचा कि जो व्यक्ति अपनी अज्ञानता को ही अपनी बुद्धिमानी मान ले, उसे समझाना असंभव है।