एक शांत गाँव में अर्जुन और विक्रम नाम के दो दोस्त रहते थे। वे दोनों छोटे-छोटे सब्ज़ियों के बगीचे उगाते थे। एक दिन, एक पड़ोसी ने गलती से अर्जुन के पौधों को कुचल दिया। यह देखकर विक्रम गुस्से से भर गया। 'उसने यह जानबूझकर किया है!' विक्रम चिल्लाया। 'हमें उसके घर जाना चाहिए, उससे झगड़ा करना चाहिए और उसका बगीचा भी बर्बाद कर देना चाहिए!'
लेकिन अर्जुन शांत रहा। 'विक्रम, लड़ने से हमें केवल गुस्सा और तनाव ही मिलेगा। हमें अपने काम पर ध्यान देना चाहिए, यही सबसे अच्छा जवाब होगा,' अर्जुन ने शांति से कहा।
विक्रम ने उसकी बात नहीं मानी। वह अपना सारा समय उस पड़ोसी के बारे में बुरा बोलने और बदला लेने की योजना बनाने में बिताने लगा। इस वजह से उसका ध्यान अपने बगीचे से हट गया और उसकी फसलें सूख गईं।
दूसरी ओर, अर्जुन ने उस बात को दिल से नहीं लगाया। उसने अपनी पूरी ऊर्जा अपने पौधों की देखभाल में लगा दी। धीरे-धीरे, अर्जुन का बगीचा बहुत बड़ा और हरा-भरा हो गया। विक्रम को अपनी गलती का एहसास हुआ। जिसने नफरत को बढ़ावा दिया वह हार गया, और जिसने नफरत को त्याग दिया वह सफल हुआ।