एक शांत गाँव में करी नाम का एक युवक रहता था। वह बुद्धिमान तो था, लेकिन उसमें एक बुराई थी: उसे इस बात की परवाह नहीं थी कि लोग उसके बारे में क्या सोचते हैं। एक बार, गाँव वालों ने मिलकर एक बड़ा जलाशय बनाने का फैसला किया। करी के मित्र अर्जुन ने उसे समझाया, 'करी, हमें सही नियमों का पालन करना चाहिए, तभी यह जलाशय सुरक्षित रहेगा।'
लेकिन करी ने उसकी बात अनसुनी कर दी। काम जल्दी खत्म करने के लिए उसने जलाशय की नींव में कमजोर पत्थर लगा दिए। उसने सोचा, 'कोई नहीं देखेगा, और अगर कोई टोकेगा भी तो मुझे क्या फर्क पड़ता है?' लेकिन जैसे ही पहली बारिश हुई, जलाशय टूट गया और गाँव वालों को बहुत परेशानी हुई। सबने करी की आलोचना की। अर्जुन ने दुखी होकर कहा, 'करी, तुमने अच्छी बातें नहीं सीखीं, तुम्हें अपनी गलतियों का पछतावा नहीं है, और तुम्हारे भीतर अच्छे गुण भी नहीं हैं। इसीलिए तुम सबका प्रिय नहीं बन सके।' करी को अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने सुधरने का संकल्प लिया।