एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। उसे लकड़ी के सुंदर खिलौने बनाने का बहुत शौक था। गाँव के मेले के लिए अर्जुन ने दिन-रात मेहनत करके बहुत ही सुंदर खिलौने बनाए। उसके दोस्त रोहन को यह देखकर जलन हुई कि कैसे सभी लोग अर्जुन के काम की तारीफ कर रहे हैं।
रोहन ने लोगों के सामने झूठ बोलना शुरू कर दिया, 'अर्जुन के खिलौने तो ठीक हैं, लेकिन देखो मैंने यह छोटा सा पक्षी बनाया है, यह ज्यादा अच्छा है।' रोहन ने तो यहाँ तक कह दिया कि अर्जुन की सफलता के पीछे उसका हाथ है, जबकि ऐसा कुछ नहीं था। वह अर्जुन की मेहनत का श्रेय लेकर खुद को बड़ा दिखाना चाहता था।
अर्जुन को यह जानकर दुख हुआ, लेकिन उसने समझ लिया कि जो लोग दूसरों को नीचा दिखाकर खुद को महान साबित करना चाहते हैं, उनके साथ रहना ठीक नहीं है। अर्जुन ने रोहन से दूरी बना ली और अपने काम पर ध्यान दिया। धीरे-धीरे अर्जुन की ईमानदारी और कला की चर्चा पूरे गाँव में होने लगी। वहीं दूसरी ओर, दूसरों की प्रसिद्धि चुराने की कोशिश करने वाले रोहन को किसी ने सम्मान नहीं दिया। अर्जुन ने सीख लिया कि असली गौरव अपनी मेहनत से मिलता है, दूसरों की छाया में रहकर नहीं।