एक शांत गाँव में अर्जुन नाम का एक युवक रहता था। वह मेहनती था, लेकिन उसकी एक कमी थी—वह बाहरी चमक-धमक से बहुत जल्दी प्रभावित हो जाता था। एक दिन, पास के एक बड़े शहर की यात्रा के दौरान, वह एक भव्य महल में पहुँचा। वहाँ उसने देखा कि सुंदर आभूषणों से सजी महिलाएँ नृत्य कर रही थीं। उनके चमकते गहनों और सुंदरता ने अर्जुन को पूरी तरह मंत्रमुग्ध कर दिया।
अर्जुन को लगा, 'यही असली जीवन है!' उस चकाचौंध में खोकर, अर्जुन ने अपनी सारी जमा-पूंजी और परिवार का भरोसा दांव पर लगा दिया। वह उस दिखावे की दुनिया में इतना डूब गया कि अंत में वह कर्ज और दुख के दलदल में फंस गया।
उसके बुद्धिमान मित्र विक्रम ने उसे समझाया, 'अर्जुन, बाहरी चमक को देखकर धोखा मत खाओ। जो लोग विवेकहीन होते हैं, उनके लिए ऐसी सुंदरता एक गहरे गड्ढे के समान है, जो सब कुछ निगल लेती है।' अर्जुन को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने तय किया कि वह अब से केवल दिखावे के पीछे नहीं, बल्कि सच्चाई और गुणों के पीछे चलेगा।