एक शांत गाँव में कानन और नीला नाम के दो मित्र रहते थे। कानन बहुत ही समझदार और मेहनती युवक था, जबकि नीला एक बहुत ही सुशील और मर्यादित लड़की थी। दोनों मिलकर खेती का काम करते थे और खुश थे।
एक शाम, गाँव के कुछ लोगों ने कानन को शराब पीने के लिए उकसाया। 'अरे कानन, बस एक बार पीकर तो देख, सब ठीक हो जाएगा,' उन्होंने कहा। दोस्तों के दबाव में आकर कानन ने शराब पी ली। अगली सुबह जब वह जागा, तो उसका सिर भारी था और मन ग्लानि से भरा था। उसे अपनी इस हरकत पर बहुत शर्म महसूस हो रही थी।
जब नीला उससे मिलने आई, तो उसने कानन की आँखों में वह चमक नहीं देखी जो हमेशा रहती थी। नीला ने उसे डाँटने के बजाय बहुत ही शांत और गंभीर स्वर में कहा, 'कानन, जो व्यक्ति शराब का गुलाम बन जाता है, वह अपना सम्मान और अच्छे मित्र दोनों खो देता है। एक मर्यादित स्त्री उस व्यक्ति से मुँह मोड़ लेती है, जो शराब पीकर अपना विवेक खो देता है।'
नीला की इन बातों ने कानन के दिल को झकझोर दिया। उसे समझ आ गया कि शराब ने न केवल उसके शरीर को, बल्कि उसके चरित्र को भी नुकसान पहुँचाया है। कानन ने उसी क्षण शराब छोड़ने का संकल्प लिया। उसने कड़ी मेहनत की और धीरे-धीरे अपना खोया हुआ सम्मान और नीला का विश्वास फिर से जीत लिया।